ज़ेरॉक्स की ज़िंदगी

ज़ेरॉक्स की ज़िंदगी

एक छोटे से मोहल्ले में आरव और विवान दो दोस्त रहते थे। दोनों की उम्र लगभग बराबर थी, स्कूल भी एक ही था और क्लास भी। लोग उन्हें “जुड़वां” कहकर बुलाते थे, क्योंकि वे हर जगह साथ ही दिखते थे।

आरव खेल-कूद में बहुत अच्छा था फिर चाहे वो दौड़ हो, क्रिकेट हो या फुटबॉल। दूसरी ओर, विवान शांत स्वभाव का था। उसे चीज़ों को ध्यान से देखना, समझना और अपनी दुनिया में खो जाना पसंद था। लेकिन एक चीज़ थी जो विवान को अलग बनाती थी, वह हमेशा आरव की नकल करता था। आरव जो करता, विवान वही करता। अगर आरव क्रिकेट खेलता, तो विवान भी बल्ला उठा लेता, भले ही उसे खेल में मज़ा न आए। अगर आरव दौड़ता, तो विवान भी दौड़ता, थकते हुए, हाँफते हुए, लेकिन रुकता नहीं।

धीरे-धीरे फर्क साफ़ दिखने लगा। आरव हर प्रतियोगिता में जीतता गया। ट्रॉफियां, मेडल, तारीफें सब उसके पास आते गए। विवान कोशिश करता रहा, लेकिन हर बार पीछे रह जाता। वह समझ नहीं पा रहा था, “मैं भी तो वही कर रहा हूँ, फिर मैं हार क्यों जाता हूँ?” उसकी आँखों में सवाल थे, और दिल में एक अजीब-सी कमी का एहसास।

एक दिन उनकी क्लास टीचर, मिश्रा मैम, ने इस बात को गौर किया। उन्होंने देखा कि विवान हर बार आरव की परछाई बनकर रह जाता है, और खुद की पहचान कहीं खोता जा रहा है। अगले हफ्ते स्कूल में एक “टैलेंट डे” रखा गया। मैम ने दोनों दोस्तों को अलग-अलग गतिविधियों में भाग लेने के लिए कहा।

आरव को तो खेल प्रतियोगिता में भेज दिया गया, लेकिन विवान से मैम ने कहा, “तुम फोटोग्राफी में भाग लो।”

विवान चौंक गया, “मैम, मुझे तो खेल पसंद है, मतलब मैं वही करता हूँ जो आरव करता है।”

मैम मुस्कुराईं, “नहीं, तुम्हें वो करना चाहिए जो तुम अच्छा कर सकते हो। मैंने देखा है, तुम चीज़ों को बहुत ध्यान से देखते हो। तुम्हारा नजरिया अलग है।” पहले तो विवान हिचकिचाया, लेकिन उसने मैम की बात मान ली।

उस दिन उसने स्कूल के पुराने कैमरे से तस्वीरें खींचीं, पेड़ों की छाया, बच्चों की हंसी, मैदान में दौड़ते हुए आरव का जोश हर तस्वीर में एक कहानी थी। जब परिणाम आए, तो कुछ अलग हुआ। आरव ने खेल प्रतियोगिता जीती, जैसा कि हमेशा होता था। लेकिन इस बार, विवान ने भी जीत हासिल की, फोटोग्राफी में पहला स्थान!

उसकी तस्वीरें सबको चौंका गईं। लोगों ने कहा, “ये तो बहुत खास है।” विवान के चेहरे पर पहली बार वो चमक आई, जो हमेशा आरव के चेहरे पर होती थी। उस दिन के बाद सब बदल गया। आरव अब भी खेलों में आगे बढ़ता रहा, और विवान ने कैमरा थाम लिया। अब वह किसी की नकल नहीं करता था। वह अपनी दुनिया खुद बनाता था तस्वीरों में।

एक दिन, दोनों मैदान के किनारे बैठे थे। विवान मुस्कुराकर बोला, “शायद मैं पहले ज़ेरॉक्स कॉपी था लेकिन अब मैं ओरिजिनल बन गया हूँ।” आरव ने हँसते हुए कहा, “और वही सबसे खास होता है।”

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