मूषक और ज्ञानलोक के सात रहस्य

स्वर्गलोक में उस दिन सब कुछ बिल्कुल सामान्य था। गणेश जी अपने मंदिर के बाहर बैठे मोदक खा रहे थे और उनका प्रिय मूषक पास ही बैठकर आने-जाने वालों को…

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ज़रूरत इन लम्हों की

बरामदे में रखी पुरानी लकड़ी की कुर्सी हर शाम की तरह आज भी दादाजी का इंतज़ार कर रही थी। सूरज ढल रहा था, और आसमान के रंग धीरे-धीरे सुनहरे से…

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यस मैडम जी!

सुबह की हल्की ठंडी हवा में जब बस स्टैंड के पास धूल धीरे-धीरे उठती थी और चाय की केतली से उठती भाप में अदरक की खुशबू घुलकर जैसे किसी पुराने…

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ज़ेरॉक्स की ज़िंदगी

एक छोटे से मोहल्ले में आरव और विवान दो दोस्त रहते थे। दोनों की उम्र लगभग बराबर थी, स्कूल भी एक ही था और क्लास भी। लोग उन्हें “जुड़वां” कहकर…

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