जाने भी दो यारों…

बारिश भरी एक शाम में दो पुराने दोस्तों के बीच अधूरी बातों, रिश्तों की उलझनों और “जाने भी दो यारों” के असली मतलब की खोज—एक ऐसी कहानी, जहाँ सुकून, इंतज़ार और अनकहे जज़्बात साथ चलते हैं।

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इनाम का चस्का

बरगद के पुराने पेड़ पर हर सुबह चहचहाहट का एक मेला लगता था। चिड़ियों का झुंड पास के खेतों से दाने चुगकर लौटता, और फिर दिन भर अपने-अपने काम में…

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हल्की फुल्की बातें

शहर के पुराने बाज़ार में हल्की-हल्की चहल-पहल थी। सब्ज़ियों की खुशबू, दुकानदारों की आवाज़ें और बीच-बीच में मोलभाव की मीठी तकरार, सब मिलकर एक परिचित-सा संगीत रच रहे थे। इसी…

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गुजिया – रिश्तों की मिठास

रिश्तों में समय रहते बातें पूरी करना, अपने मन की बात कहना और भावनाओं को सहेजना ज़रूरी होता है। कुछ चीज़ें सुधारी जा सकती हैं, लेकिन हर बार नहीं। इसलिए…

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